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Tuesday, 10 May 2011

कमाई शुरू होते ही रखें बचत की बुनियाद


महंगाई के दौर में भविष्य की जरूरतें पूरी करने के लिए सिर्फ मोटी तनख्वाह ही पर्याप्त नहीं है। यदि कुछ जरूरी बातों पर गौर किया जाए तो कम सेलरी में भी अच्छा खासा गुजारा किया जा सकता है। इसके लिए जरूरी है कि नौकरी के साथ ही बचत की शुरुआत कर देनी चाहिए। आमदनी के 30 फीसद हिस्से का सुनियोजित ढंग से निवेश किया जाए तो आप काफी चिंताओं से मुक्ति पा सकते हैं


पहला जॉब किसी भी व्यक्ति के लिए नए युग की शुरुआत होता है। इंजीनियरिंग, मेडिकल और मैनेजमेंट की डिग्री हासिल करना किसी चुनौती से कम नहीं है। फीस के रूप में लाखों रुपए खर्च करने के बाद कोई भी छात्र कम से कम दस हजार रुपए मासिक हास्टल आदि पर खर्च कर देता है। बच्चों की तरक्की के लिए मां-बाप भी कोई कंजूसी नहीं बरतते हैं। इससे छात्रों का खर्च के मामले में हाथ काफी खुल जाता है जो उनके सुरक्षित भविष्य के बाधा साबित होता है। ऐसे में बहुत से छात्र नौकरी के बाद भी उधार की जिंदगी जीते हैं। ऐसे हालात से बचने के लिए पहली सेलरी मिलते ही बचत की शुरुआत करने का संकल्प लें।
पहली सेलरी आजादी का अहसास कराती है। इसके साथ ही कई अवसर भी पेश करती है। यदि आपके परिवार को आर्थिक मदद की दरकार है तो आप अपनी नौकरी से परिजनों की जरूरतों को पूरा कर सकते हैं। यदि उन्हें आपकी आर्थिक सहायता की जरूरत नहीं है तो भी अपनी आमदनी के बारे में उचित फैसला लेना आपका ही दायित्व है। ऐसे में जरूरी है कि नौकरी मिलते ही आप निवेश की ऐसी योजना बनाएं जो आपके साथ-साथ आपकी आने वाली पीढ़ी के भविष्य की भी सुरक्षा करे। यह कार्य कतई कठिन नहीं है। बस जरूरत है आपकी पहल की। बूंद-बूंद से घड़ा भरने की तर्ज पर एक लक्ष्य बना लीजिए कि हर माह वेतन में से 30 फीसद बचत करनी है। यदि आप ऐसा करने में सफल हो गए तो समझो कि आपने अपना भविष्य सुरक्षित कर लिया। अब सवाल यह है कि आखिर क्या करें? इसके लिए आपको किसी खास विशेषज्ञ के पास जाने की जरूरत नहीं है। आप सिर्फ कुछ परंपरागत सुझावों पर गौर कर सकते हैं।
इच्छाओं पर काबू रखें
सुखमय जीवन के लिए यह मूल मंत्र आत्मसात करना जरूरी है। दरअसल नौकरी मिलते ही लोगों की आकांक्षाएं बढ़ जाती हैं। बाइक, महंगा मोबाइल फोन, लैपटाप और रहन-सहन के स्तर में सुधार जैसी चीजें अहम जरूरतें बन जाती हैं। अतीत से तुलना करने पर इच्छाएं और बढ़ जाती हैं। कालेज छोड़कर आए छात्रों की सोच रहती है कि जब पढ़ाई के दौरान वह अच्छा-खासा खर्च लेते थे तो अब तो वह स्वयं कमा रहे हैं। इसी के साथ समस्याओं की नींव पड़ जाती है। कर्ज लेकर शौक-मौज पूरे करना युवा वर्ग का शगल बन गया है। ऐसे लोग नौकरी की शुरुआत में ही कर्ज के जाल में फंस जाते हैं जो फिर चाह कर भी इससे बाहर नहीं निकल पाते। ऐसे में मा-बाप के भरोसे का कत्ल होने में भी ज्यादा समय नहीं लगता। यदि आपका सेलरी पैकेज छोटा है तो यह संकट और भी ज्यादा बढ़ जाता है। इससे बचने के लिए अपनी इच्छाओं पर काबू रखें। अपनी जेब की क्षमता के अनुसार ही खर्च करने की योजनाएं बनाएं।
कर्ज से बचें
जितना संभव हो सके आप कर्ज लेने से बचें। नौकरी के साथ ही व्यक्ति की जरूरतें बढ़ जाती हैं। इन्हें पूरा करने के लिए हर कोई कर्ज लेने की सोचता है। अगर आप किसी नामचीन कंपनी के साथ जुड़े हुए हैं तो आपको सीट पर बैठे ही कर्ज मिल जाएगा। यानी क्रेडिट कार्ड और अन्य प्रकार के लोन देने वाले लोग आपके पास आकर संपर्क करेंगे। यही नहीं निवेदन के साथ आपको तरह-तरह के फायदे भी गिनाएंगे। अगर आप एक बार ईएमआई के जाल में फंस गए तो समझो आगे संकट ही संकट है। क्योंकि महंगाई के दौर में सेलरी बाद में बढ़ती है और खर्च का बजट पहले से तैयार हो जाता है। यदि आप मकान या किसी अन्य जरूरी कार्य के लिए कर्ज ले रहे हैं तो इसमें कोई बुराई नहीं है लेकिन इस बात का खयाल रखें कि कर्ज की सीमा आपकी आमदनी के दायरे में ही होनी चाहिए।
बीमा कराएं
आमदनी शुरू होने पर पहला लक्ष्य बीमा खरीदने का होना चाहिए। यह आपके साथ आपके आश्रितों के लिए भी जरूरी है। अगर आप कम उम्र में बीमा करा रहे हैं तो आपको कम प्रीमियम का भुगतान करना होगा। उम्र बढ़ने के साथ ही बीमा प्रीमियम भी बढ़ता जाता है। बीमा का कवर आपके सालाना वेतन से दस गुना तक मिल सकता है। जीवन बीमा के प्रीमियम पर आपको आयकर में भी छूट मिलती है। ऐसे में आपके एक पंथ कई काज संपन्न हो जाएंगे। इस दौरान आपको यह बात ध्यान में रखनी होगी कि बीमा के फैसले का आधार कर लाभ नहीं बल्कि आर्थिक सुरक्षा होनी चाहिए। बीमा की शुरुआत टर्म प्लान के साथ कर सकते हैं। वास्तव में यही विशुद्ध बीमा है। हालांकि इसमें कोई रिटर्न नहीं मिलता लेकिन कम पैसे में ज्यादा कवर मिल जाता है। यदि आपकी कंपनी मेडिक्लेम की सुविधा नहीं देती है तो आप अपनी जरूरत के मुताबिक स्वास्थ्य बीमा जरूर लें। इसके भुगतान पर भी आपको आयकर से राहत मिलेगी।
नियमित रूप से करें बचत
उम्र बढ़ने के साथ-साथ व्यक्ति की जिम्मेदारियां भी बढ़ती जाती हैं। ऐसे में बचत की आदत डालना जरूरी है। इसकी शुरुआत बेसक छोटी पूंजी के साथ की जाए। सुखमय जीवन के लिए वेतन की 30 फीसद बचत आदर्श मानी जाती है। इस मामले में यदि आपने ढुलमुल रवैया अपनाया तो आप उधार की जिंदगी बिताने और मन मसोसने के लिए तैयार रहिए। किसी भी सूरत में हर माह बचत की आदत डालिए। यदि आपके वेतन में इजाफा होता है तो बचत भी उसी अनुपात में बढ़ाएं। बोनस, इंसेंटिव और छुट्टियों के भुगतान से घूमने-फिरने और घर की साज-सज्जा बढ़ा सकते हैं।

कहां करें निवेश


यह एक अहम सवाल है कि आखिर निवे कहां करें। कमीान के चक्कर में जब कुछ सलाहकार इधर-उधर की सलाह देने लगते हैं तो यह दुविधा और भी ज्यादा बढ़ जाती है लेकिन आपको किसी के झांसे में आने की जरूरत नहीं है। किसी भी निवेश की योजना की शुरुआत किसी खास उद्देश्य के साथ की जानी चाहिए। इसे लघु, मध्यम और लंबी अवधि में बांट सकते हैं। यदि आपको कोई गैजेट खरीदना है या फिर मकान। इसके लिए तय करें कि कितनी धनराशि की जरूरत पड़ेगी। हालांकि शेयर बाजार में निवेश पर अन्य विकल्पों की तुलना में ज्यादा रिटर्न मिलता है लेकिन यहां जोखिम ज्यादा रहता है। इसीलिए अपनी जोखिम की क्षमता के अनुसार ही निवेश का विकल्प चुनना बेहतर रहता है। नौकरीपेशा लोगों के लिए पीपीएफ सबसे सुरक्षित और परंपरागत निवेश माना जाता है। इस निवेश पर आपको आयकर में छूट भी मिलेगी। इसके अलावा एनएससी और आरडी का विकल्प चुन सकते हैं। आजकल सावधि जमा (एफडी) पर भी अच्छा रिटर्न मिल रहा है। बचत का एक हिस्सा म्यूचुअल फंड में भी लगा सकते हैं। जोखिम से बचने के लिए एसआईपी बेहतर साबित हो सकता है। इसकी मंथली ईसीएस कराई जा सकती है। बहरहाल बचत के मामले में देर मत कीजिए। आपकी लापरवाही का मतलब हैअभी नहीं तो कभी नहीं। हर इंसान को कमाई के साथ ही बचत की शुरुआत करनी चाहिए। जो व्यक्ति जितनी जल्दी बचत की शुरुआत करता है, उसका भविष्य उतना ही ज्यादा सुरक्षित रहता है। महंगाई के दौर में मासिक आय की 30 फीसद बचत जरूर करनी चाहिए। इस पैसे को एक जगह लगाने के बजाय पीपीएफ, बीमा और एसआईपी में बांटकर लगाया जाए तो अच्छा रिटर्न मिल सकता है
अनिल चोपड़ा, सीईओ बजाज कैपिटल
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