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Thursday, 28 April 2011

भूकंप के खतरे से करें घर को सुरक्षित

जापान में भूकंप के बाद आई सुनामी ने भारी तबाही मचाई है। इससे हजारों लोगों को अपने घर-वार से हाथ धोना पड़ा है। भारत में भी एक बड़ा भूभाग डेंजर जोन में आता है। बरसों पहले जमीन दहलने से लातूर, भुज और उत्तर काशी के लोग बरसों बाद भी उबर नहीं पाए हैं। पिछले दिनों राष्ट्रीय राजधानी सहित पूरे उत्तर भारत में कंपन महसूस की गई थी। ऐसे में घर का बीमा कराकर आप अपनी चिंताओं को थोड़ा कम कर सकते हैं। बेशक यकीन न हो लेकिन यह सच है कि रोजाना एक कप चाय की कीमत पर आप अपने घर का 20 लाख रुपए तक का बीमा कवर खरीद सकते हैं
दैवीय आपदाओं पर किसी का बस नहीं चलता। पिछले दिनों जापान में आए भूकंप से हजारों लोग बेघर हो गए। इस लिहाज से भारत भी सुरक्षित नहीं है। भूवैज्ञानिकों ने देश के 200 से ज्यादा जिलों को भूकंप की दृष्टि से खतरनाक घोषित किया है। इससे देश की करीब आधी आबादी पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। ऐसे में करोड़ों लोगों की जिंदगी और प्रॉपर्टी दाव पर है। भावनाओं के नुकसान की भरपाई तो कोई नहीं कर सकता लेकिन पर्याप्त बीमा कवर खरीदकर दैवीय आपदाओं से होने वाले नुकसान की चोट से संभलने में होम इंश्योरेंस से मदद जरूर मिलेगी। आपको बेशक यकीन न हो, लेकिन यह सच है कि महज चार रुपए प्रतिदिन के खर्च पर आप अपने घर के लिए 20 लाख रुपए तक का बीमा कवर हासिल कर सकते हैं।
इसके बावजूद ज्यादातर लोग इंश्योरेंस का मतलब सिर्फ जीवन बीमा से लगाते हैं। बीमा कंपनियों की तमाम शाखाओं में होम इंश्योरेंस का प्रचलन बहुत ही कम है। बीमा उद्योग में निजी क्षेत्र की कंपनियों के उतरने से हालांकि इसमें थोड़ी वृद्धि हुई है। इस समय अधिकतर जनरल इंश्योरेंस कंपनियां भूकंप, सुनामी, बाढ़ और आग से होने वाले नुकसान की भरपाई लिए कई तरह के बीमा उत्पाद बेच रही हैं। इनमें से आप अपनी पसंद के विकल्प का चुनाव कर सकते हैं। आप्टिमा इंश्योरेंस ब्रोकर्स के रीटेल हेड अमित शर्मा कहते हैं कि होम इंश्योरेंस तीन प्रकार से कराया जा जाता है। पहला- घर की बिल्डिंग का, दूसरा- घर के सामान का और तीसरा इन दोनों का। इन जोखिमों को कवर करने के लिए बीमा कंपनियों के पास कई तरह के उत्पाद हैं जिनमें किसी भी प्राकृतिक आपदा या मानवीय दुर्घटनाओं के चलते बीमित घर और उसमें रखे सामान को होने वाली नुकसान की भरपाई की जाती है।
बीमा का दायरा
श्री शर्मा कहते हैं कि होम इंश्योरेंस के तहत आप भूकंप, सुनामी, बाढ़, आग, विस्फोट, बिजली गिरना, तूफान, गैस लीकेज, वाटर टैंक या पाइप लीकेज होना या फटना, चोरी या डकैती से नुकसान होने की स्थिति में बीमा की रकम हासिल कर सकते हैं। भावी जोखिम से बचने के लिए जरूरी है कि अपना घर की बिल्डिंग के साथ-साथ फर्नीचर, कपड़े, स्टीरियो, कंप्यूटर, लैपटाप, टीवी, फ्रिज और गहनों को भी होम इंश्योरेंस में शामिल कराना चाहिए। बीमा कवर में महंगी कलाकृतियां और स्टोन्स भी शामिल किए जा सकते हैं। इसके जरिए आपको प्राकृतिक आपदा से होने वाले नुकसान की भरपाई मिल सकती है। इसके अलावा घर में चोरी या डकैती होने की स्थिति में भी बीमा कंपनियां मुआवजा देती हैं। याद रखें सामान गुम होने की स्थिति में कंपनियां क्लेम नहीं देती हैं। ताला टूटने या सेंध लगने के बाद चोरी गए सामान के क्लेम पर ही विचार किया जाता है।
कौनसी पालिसी लें
बीमा विशेषज्ञों के अनुसार लगभग सभी जनरल इंश्योरेंस कंपनियां प्राकृतिक आपदाओं से होने वाले नुकसान के लिए सुरक्षा कवर मुहैया कराती हैं। कोई भी व्यक्ति हाउस होल्ड इंश्योरेंस और पर्सनल एक्सीडेंट इंश्योरेंस पालिसी खरीदकर अपना और मकान का बीमा कवर हासिल कर सकता है। व्यवसायी फायर और प्रोजेक्ट इंश्योरेंस खरीद कर अपने कारोबार को सुरक्षा कवर दे सकते हैं। इसी तरह दुकानदार शॉपकीपर्स इंश्योरेंस पालिसी लेकर अपनी दुकान को जोखिम से सुरक्षा प्राप्त कर सकते हैं। इनमें हाउस होल्डर्स पैकेज पालिसी आपके लिए बेहतर विकल्प साबित हो सकता है। इसके लिए न्यू इंडिया इंश्योरेंस, बजाज आलियांज और एचडीएफसी की पालिसी खरीदी जा सकती हैं। इसके अलावा रिलायंस जनरल, एमएस चोलामंडलम जनरल इंश्योरेंस, इफ्को टोकियो की होम सुविधा, आईसीआईसीआई लोंबार्ड की होम गोल्ड प्लान और एचडीएफसी की होम सिक्योर स्कीम लेकर अपने घर को सुरक्षा कवच दे सकते हैं।
किफायती प्रीमियम
होम इंश्योरेंस कंपनियां अपनी पालिसी में घर की मार्केट वैल्यू कवर नहीं करती हैं। घर की मार्केट वैल्यू में जमीन और उस पर कंस्ट्रक्शन यानी दोनों की कीमत शामिल होती है। कंपनियों की दलील होती होती है भूकंप या सुनामी जैसी दैवीय आपदा से अमूमन जमीन को कोई नुकसान नहीं होता है। सिर्फ घर को क्षति पहुंचती है। इसीलिए घर के नुकसान की क्षति की ही भरपाई की जाती है। श्री शर्मा के अनुसार घर के एरिया और प्रति वर्ग फुट के हिसाब से कंस्ट्रक्शन रेट को गुणा करके बीमा की कुल रकम तय की जाती है। यदि आपका घर 1000 वर्ग फीट में बना हुआ है और इसकी कंस्ट्रक्शन लागत 1000 रुपए प्रति वर्ग फुट है तो आपके घर को 10 लाख रुपए का बीमा कवर मिलेगा। श्री शर्मा कहते हैं कि दरअसल लोगों में मकान का बीमा कराने के प्रति रुझान ही नहीं है। गौर किया जाए तो रोजाना केवल एक कप चाय की कीमत पर आपको घर को बीमा कवर मिल सकता है। जनरल इंश्योरेंस कंपनियां औसतन प्रति 1000 रुपए पर महज 50 पैसे प्रीमियम लेती हैं। इस लिहाज से 10 लाख रुपए का सालाना प्रीमियम टैक्स सहित 550 रुपए बैठता है। यदि इसमें पांच लाख रुपए के सामान का भी बीमा शामिल कर लिया जाए तो प्रीमियम की राशि करीब 700 रुपए होगी। इस पालिसी में राइडर भी ले सकते हैं जिसमें आतंकवाद और दंगे के दौरान हुए नुकसान का जोखिम भी शामिल हो जाता है।
और क्या करें
- घर का बीमा कराते समय सबसे पहले कवर की अवधि का आकलन करें
- बीमा का कवर पर्याप्त होना चाहिए जिससे घर को दोबारा बनाया जा सके
-  यह सुनिश्चित करें कि पालिसी में घर की कौन-कौसी चीजें कवर हो रही हैं
- पालिसी लेते समय आपको क्लेम का तरीका भी पूरी तरह समझ लेना चाहिए
- एक से ज्यादा कंपनियों की पालिसी के फीचर्स की आपस में तुलना करें
- इनमें से आप किफायती और आकषर्क पालिसी का चुनाव कर सकते हैं
- सुनिश्चित करें कि कवर के रूप में जितना पैसा बताया जा रहा है, वह सारा क्लेम के रूप में मिलेगा या उससे कुछ कम
- यह भी देख लें कि बीमा कंपनी उन सभी सामान की कीमत दे जिनका आपको नुकसान हुआ है
- क्लेम के दौरान कंपनियां जांच करती हैं कि वास्तव में ये चीजें आपके पास थी भी अथवा नहीं
- ऐसे हालात से बचने के लिए अपना पक्ष मजबूत रखने के लिए कर्वड सामान की वीडियो सीडी बना सकते हैं
- इस सीडी को घर में ही न रखें, बाकी सामान के साथ आप इसे भी खो सकते हैं
-  इससे बचने के लिए सीडी के डाटा को अपनी ईमेल आईडी पर डाल सकते हैं
- यदि आप अपार्टमेंट में रहते हैं तो हो सकता है कि आपके फ्लैट का बीमा हो
-  लंबी अवधि की पालिसी लेना मानसिक और आर्थिक रूप से बेहतर रहता है
-किसी भी असुविधा से बचने के लिए पालिसी का प्रीमियम समय पर भुगतान करें।

1 comment:

  1. devnama ki shuruaat ke liye badhai. lekha behtar and satik hai9.

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