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Thursday, 28 April 2011

शेयर बाजार में छलावा

 
शार्टकट के जरिए मोटा पैसा कमाने की ख्वाहिश हर किसी की होती है। इसके लिए लोग शेयर बाजार का रुख करते हैं लेकिन यहां खासकर छोटे निवेशक को लुटने के बाद ही अक्ल आती है

चमत्कार को नमस्कार की परंपरा चिरकाल से चली आ रही है। यह कहावत शेयर बाजार से जुड़े लोगों के लिए जोखिम भरी है। चालू वित्त वर्ष में बंबई शेयर बाजार का संवेदी सूचकांक सेंसेक्स अब तक करीब 80 फीसद की रिटर्न दे चुका है। इस दौरान शेयर बाजार के माहिर खिलाड़ी मोटी कमाई करके अपने वारे-न्यारे कर चुके हैं लेकिन बड़ी संख्या में नौसिखिए निवेशकों की मेहनत की कमाई पर पानी फिर गया। दरअसल बाजार में बड़ी संख्या में लोग महज सुनी सुनाई बातों पर भरोसा करके पैसा लगा देते हैं। आजकल टीवी चैनलों पर तमाम विशेषज्ञ आकर अलग-अलग शेयरों में पैसा लगाने की सलाह देते हैं। इसी तरह ब्रोकर चढ़ते शेयरों पर बाजी लगाने के लिए प्रेरित करते हैं। विशेष अभियान के दौरान कोई विशेष शेयर कुछ दिनों ऊपर चढ़ता है तो आम निवेश भी उस पर लट्टू हो जाता है। दरअसल किसी नवोदित निवेशक को कोई एक शेयर मुनाफा दे देता है तो वह अपने दस और सहयोगियों को अमूक शेयर खरीदने के लिए निशुल्क सलाह दे देता है। अधिकांश मामलों में यह सलाह घाटे का सौदा साबित होती है।
बाजार में ऐसे सैकड़ों शेयर आए जो चंद दिनों में सौ गुना से भी ज्यादा चढ़ गए। तेजी के दौर में पेंटासाफ्ट टेक्नोलाजी का दस रूपए मूल्य का शेयर चंद दिनों में 2300 के भाव पर पहुंच गया। जब यह शेयर आम लोगों के हाथों में पहुंचा तो धड़ाम से जमीन पर आ गया। बाजार में इस समय यह शेयर 60 पैसे पर है। यह तो महज बानगी है। बाजार में इस समय भी सैकड़ों शेयर इस हालात में हैं और न जाने कितने तो गायब ही हो गए। अब इनमें लेनदेन भी बंद है। जाहिरतौर पर इनके पीछे कंपनी के प्रमोटर और ब्रोकरों की साठगांठ होती है। पहले इन शेयरों को वह खुद ऊंची कीमतों पर ले जाते हैं और अच्छे भाव मिलने पर मुनाफा वसूली करके निकल जाते हैं। ऐसे में कभी-कभार खरीदारी करने वाले लोगों को लालच में आकर भेड़चाल में शामिल नहीं होना चाहिए। किसी भी कंपनी में पैसा लगाने से पूर्व उसके शेयर की रफ्तार देखने की बजाय उसकी बुनियाद परखिए। इस दौरान कंपने के कारोबार और बैलेंस शीट को देखिए। यदि किसी कंपनी का शेयर तेजी से ऊपर जा रहा है तो उसका कारण पता करना चाहिए। यदि किसी परिवार में एक जवान लड़की की सेलरी 10 हजार रूपए है और वह 15 हजार रूपए महीने अपने ऊपर खर्च करती है तो मामला जरूर संदेहास्पद हो सकता है। ऐसे में परिजनों ने जरा भी लापरवाही की तो समझो पानी सिर के ऊपर से निकल गया। यही स्थिति शेयर बाजार से जुड़े कारोबारियों पर लागू होती है।
शेयर बाजार में इस तरह की घटनाओं में अब तक हजारों लोग बर्बाद हो चुके हैं। इसका एक रोचक किस्सा भी खूब प्रचलित है। बहुत पहले किसी गांव में एक व्यापारी आया। उसने घोषणा की कि जो भी व्यक्ति एक बंदर पकड़ कर लाएगा उसे 100 रूपए दिए जाएंगे। गांव की महिला और पुरूष बंदर पकड़ने में जुट गए। व्यापारी ने सभी लोगों को प्रति बंदर 100-100 रूपए का भुगतान कर दिया। कुछ दिनों बाद बंदरों की आपूर्ति कम हो गई तो व्यापारी ने प्रति बंदर 200 रूपए देने का ऐलान कर दिया। इस पर लोगों में बंदर पकड़ने का क्रेज बढ़ गया। बंदरों की आमद दोबारा मंद पड़ी तो व्यापारी ने घोषणा की कि अब हर व्यक्ति को बंदर पकड़ कर लाने पर 500 रूपए दिए जाएंगे। इससे ग्रामीणों का उत्साह बढ़ा और वे आसपास के गांवों में भी बंदर पकड़ने के लिए निकल पड़े। इस दौरान किसी भी व्यक्ति ने यह जानने की कतई कोशिश नहीं की कि आखिर वह बंदरों का करेगा क्या?
इस बीच बंदर खरीदने की चर्चा आसपास के गांवों में फैल गई और व्यापारी का कारोबार अच्छा चल निकला। थोड़े दिनों में ही दूरदराज के गांवों और जंगलों में बंदर दिखने बंद हो गए। आपूर्ति बंद होने पर व्यापारी ने ग्रामीणों की पंचायत बुलाई और कहा, मैं बिजनेस के काम से शहर जा रहा हूं। कुछ दिन का समय लगेगा। आप लोग बंदर इकट्ठे करने में जुट जाएं। मेरे आने पर सभी लोगों को 5000 रूपए प्रति बंदर का भुगतान किया जाएगा।व्यापारी फार्म हाउस में कैद बंदरों की रखवाली के लिए अपने मुनीम को छोड़कर शहर चला गया।
इस दौरान मुनीम ने ग्रामीणों से साठगांठ कर ली। मुनीम ने भी सोचा कि फार्म हाउस में कैद बंदरों को व्यापारी आसानी से गिन नहीं पाएगा। ऐसे में मैं आपको 3000 रूपए प्रति बंदर दे सकता हूं और वैसे भी बाद में ये सभी बंदर आने तो यहीं पर हैं। मुनीम के आफर देते ही ग्रामीण बंदर खरीदने के लिए उमड़ पड़े। कुछ लोगों ने तो घर जेवरात आदि बेचकर रकम का इंतजाम किया। शाम होते-होते फार्म हाउस खाली हो गया। उस रात के बाद व्यापारी और मुनीम गांव में कभी नहीं देखे गए लेकिन गांव में चारों आ॓र बंदर ही बंदर जरूर दिखाई देने लगे। यह घटना दादा-दादी की तरह एक मनगढ़ंत कहानी जरूर मानी जा सकती है लेकिन इससे सहज अंदाजा लगाया जा सकता है कि शेयर मार्केट में कैसे कारोबार होता है।

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